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राज्य सरकार और जिला प्रशासन, छावनी परिषद के साथ कर रहा सौतेला व्यवहार : सीईओ

वाहन प्रवेश शुल्क लगाने पर विचार, 11 एजेंडे पर छावनी की बोर्ड मीटिंग आयोजित

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छावनी परिषद की वित्तीय स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि छावनी परिषद नाली और सड़क की मरम्मत के लिए भी पैसे खर्च करने की स्थिति में नहीं है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि छावनी परिषद के खाते में इतना भी पैसा नहीं बचा है, कि वे अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सही तरीके से वेतन, पेंशन आदि मुहैया करा सके।

Cantt_Board_Meating_01@नज़र टीमपूनम सिंहरामगढ ( झारखंड ) :- रामगढ़ छावनी परिषद की बोर्ड मीटिंग सोमवार को 11 एजेंडे पर आयोजित हुई। इस बैठक में सभी पार्षदों ने एक स्वर में इस बात पर मुहर लगाया कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। इसलिए छावनी परिषद क्षेत्र में वाहन प्रवेश शुल्क लगाया जाए।

छावनी परिषद के सीईओ सपन कुमार ने कहा कि नियमानुसार दूसरे नगर निकायों के अनुरूप छावनी परिषद के विकास के लिए भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सक्रिय होना है। लेकिन किसी का भी फंड छावनी परिषद को नहीं मिल रहा है। लिहाजा छावनी परिषद की वित्तीय स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि छावनी परिषद नाली और सड़क की मरम्मत के लिए भी पैसे खर्च करने की स्थिति में नहीं है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि छावनी परिषद के खाते में इतना भी पैसा नहीं बचा है, कि वे अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सही तरीके से वेतन, पेंशन आदि मुहैया करा सके।

एमपी, एमएलए, डीसी और एसपी के साथ होगी वर्चुअल मीटिंग – अधिशासी अधिकारी

छावनी परिषद के सीईओ सपन कुमार ने कहा कि बोर्ड मीटिंग में सबसे बड़ा मुद्दा वाहन प्रवेश शुल्क कानून लगाने का है। इस मुद्दे पर सबसे पहले सांसद जयंत सिन्हा, विधायक ममता देवी, डीसी संदीप सिंह और एसपी प्रभात कुमार के साथ वर्चुअल मीटिंग की जाएगी। इस मीटिंग में छावनी परिषद अपना त्राहिमाम संदेश सभी के सामने रखेगा। जनप्रतिनिधि और अधिकारी विकास के मुद्दे पर छावनी परिषद को सहयोग नहीं करते हैं, तो अपने क्षेत्र में छावनी परिषद फंड जनरेट करने के लिए इस कानून को लागू कर देगा।

डीएमएफटी और सीएसआर फंड उपलब्ध कराए प्रशासन : अनमोल सिंह

Cantt_Board_Meating_02बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए छावनी परिषद के उपाध्यक्ष अनमोल सिंह ने कहा कि छावनी परिषद वित्तीय संकट से जूझ रहा है। पिछले कई वर्षों से लगातार राज्य सरकार, नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन से सहयोग की गुहार लगाई गई। लेकिन किसी ने दी कोई सहयोग नहीं किया। जिले में डीएमएफटी का करोड़ों का फंड है। लेकिन उससे भी छावनी परिषद में विकास की कोई योजनानहीं लाई जाती है। सीएसआर फंड से भी जिले के विभिन्न स्थानों पर कई कार्य होते हैं। लेकिन छावनी परिषद क्षेत्र में कोई काम नहीं हो रहा है। इन दोनों फंड पर भी छावनी परिषद का अधिकार है।

वोट लेने के बाद सांसद और विधायक झाड़ लेते हैं पल्ला : राजेंद्र नायक

छावनी परिषद की बोर्ड बैठक वार्ड पार्षद राजेंद्र नायक ने कहा कि छावनी परिषद क्षेत्र की जनता से सांसद और विधायक वोट तो लेते हैं, लेकिन जब विकास की बात आती है तो पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने कहा कि रामगढ़ नगर परिषद में करोड़ों रुपए की लागत से सड़कें, नाली, गली आदि का निर्माण हो रहा है। लेकिन छावनी परिषद क्षेत्र में दर्जनों प्रमुख सड़कें जर्जर हालत में है, उसकी सुध नहीं ली जा रही है। उन्होंने कहा कि जब भी छावनी परिषद की बात आती है, जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों से मुंह मोड़ लेते हैं।

आमदनी 16 करोड और खर्चा 30 करोड़ : सीईओ

प्रेस कॉन्फ्रेंस में छावनी परिषद के सीईओ सपन कुमार ने सालाना बजट को भी साझा किया है। उन्होंने कहा कि छावनी परिषद को 14 करोड़ सेंट्रल एड मिलता है। इसके अलावा ढाई करोड रुपए टैक्स से वसूले जाते हैं। लेकिन खर्चा दुगना है। उन्होंने बताया कि सैलरी और पेंशन में ही लगभग 14 करोड रुपए प्रति वर्ष कर्मचारियों को दिए जाते हैं। इसके अलावा पूरे साल में सफाई, विद्युतीकरण, नाली निर्माण, सड़कों की मरम्मत जैसे कार्यों में करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। एक अनुमानित तौर पर कहा जाए तो लगभग 30 करोड़ रुपए छावनी परिषद क्षेत्र में प्रतिवर्ष खर्च होता है। फंड नहीं होने की वजह से ही लगभग 60 लाख रुपए का बिजली बिल का भुगतान अभी तक नहीं किया जा सका है। छावनी परिषद में लगातार खर्च बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से इस बार केंद्र सरकार को लगभग 34 करोड रुपए के आवंटन के लिए पत्र लिखा गया है।

विकास योजनाओं को बोर्ड मीटिंग में मिली स्वीकृति

बोर्ड बैठक में छावनी परिषद क्षेत्र में विकास योजनाओं को स्वीकृति मिली है। जिसमें शहर के नेहरू रोड व अन्य प्रमुख सड़कों की मरम्मत करने, शहर में गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने, नया बस स्टैंड में नया यात्री शेड बनाने, बिजुलिया तालाब के सौंदर्यीकरण में बाउंड्री, ओपन वाकिंग प्लेस, कैफेटेरिया और बच्चों के लिए बोटिंग की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त कोरोना काल में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए एसबीआई से मेडिकल बीमा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड मीटिंग में 55 भवनों का नक्शा पास किया गया और एक का एक्सटेंशन किया गया है।

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