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लॉक डाउन में साक्षात भोलेशंकर हुए प्रकट , लोग भक्ति में डूबे

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झारखंड के कई जिलों में साक्षात भोलेशंकर के प्रकट होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई है । आम दिन होता तो श्रद्धा का ऐसा ज्वार उठता की उसे रोक पाना बस की बात नहीं थी लेकिन लॉक डाउन में लोग धैर्य से काम ले रहे हैं ।

LordShiva2@नज़र डेस्कराँची ( झारखंड ):- भारत विभिन्न पंथ , संप्रदाय , भाषा संस्कृति को समेटे वह देश है जहाँ कहा गया है कि यहाँ के कण – कण में शंकर का वास है । 21 वीं सदी में इसे अन्धविश्वाश कहें या श्रद्धा की पूरा देश आज कोरोना वायरस ( COVID – 19 ) की महामारी से लड़ रहा है इसकी रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉक डाउन है ।

उसी समय झारखंड के कई जिलों में साक्षात भोलेशंकर के प्रकट होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई है । आम दिन होता तो श्रद्धा का ऐसा ज्वार उठता की उसे रोक पाना बस की बात नहीं थी लेकिन लॉक डाउन में लोग धैर्य से काम ले रहे हैं ।

यह खबर कहाँ से किसने फैलाई इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है लेकिन लोग अपने घरों में इसका प्रयोग कर पूरा परिवार भक्ति में लीन है । जैसे हमारे यहां श्री गणेश और नंदी जी को दूध पीने की खबर पर लोग बाग मूर्ति और कैलेंडरों में दूध पिलाने लगे थे उसी प्रकार यह खबर जंगल में आग की तरह फैली है कि घर में रखे शिलापट्ट /सिलौटी ( मसाला पीसने का पत्थर ) में साक्षात भोलेशंकर प्रकट हुए हैं । पूरी श्रद्धा से शुद्ध होकर जो भी इसकी घी का दीया जलाकर पूजा करेगा उसका सिलौटी पर लोढ़ा खड़ा हो जाएगा ।

चरही के शंकर सोनी नें बताया कि उनके किसी संबंधी नें उन्हें फोन कर बताया कि इस विधि से पूजा करने से घर में साक्षात भोलेशंकर प्रकट हो जाएंगे । उनके घर में कई सदस्यों नें करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए । जब उनकी माता नें भोलेबाबा को याद कर भूल चूक के लिए माफी मांगते हुए यही प्रक्रिया दोहराया तो शील पर लोढ़ी खड़ा हो गया । इसके बाद पूरा परिवार भक्ति में सराबोर है ।

हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण है या महज अफवाह लेकिन जो भी हो लॉक डाउन के इस नीरस भरे माहौल में भक्त और भगवान की दूरी कम तो जरूर हुई है ।

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